Tuesday, August 21, 2012

पल पल अनोखा यह प्यारा समा,
खयालो में खोया यह मन कहा,
परिंदों की तरह भर रहा उड़ान,
ले जाये शीतल हवा अब जहा जहा ।

बहारा बहारा यह नील गगन,
समुन्दर की लहरों में हुआ यु मगन,
ले जा कही दूर, कह रहा मेरा मन,
प्रकृति से करवादे मेरा तू लगन।


Friday, August 17, 2012

ओ-खुदा तू आज याद आया!


गम के बादल में क्यों ऐसे घिरा,
खुदा की नज़रों में यु गिरा,
ओ - खुदा - ओ - खुदा, तू आज याद आया,
खुद से जो मैं परेशां, चाहता हु तेरा साया!

सासे चल रही, महसूस नहीं होता कुछ हैं पाया,
ढलते सूरज की यह है माया,
जीवन से मांग रहे जीने का किराया,
ओ - खुदा - ओ - खुदा, तू आज याद आया,
खुद से जो मैं परेशां, चाहता हु तेरा साया!

Friday, August 10, 2012

ज़िन्दगी के ढंग, इस तरह बदल रहे रंग,
मानो बना रहा एक नया रास्ता, नये समय के संग,
भविष्य की कल्पना कर रहा यह विचलित मन,
ना जाने क्या सोच रहा प्रत्येक शंण !

Thursday, September 1, 2011

जीवन के पल!

लम्हा लम्हा जीवन की गठरी बन रही,
यादों का एक अक्स बना रही,
समय के पहिये के साथ साथ चल रही,
नया सफ़र प्रत्येक दिन तय कर रही|

जीवन और कश्ती में नहीं कोई अंतर,
कठीन लहरों का सामना कर रहे निरंतर,
बड रहे आगे लेकर एक अपेक्षा,
कोशिश एक आशा, कोशिश एक आशा!

सपना है एक पलकों में, लम्हे कट रहे इंतज़ार में,
आखों में समाया राजा के एक तक्त,
कुछ और ही बता रही हथेली की हकीकत,
चल रहा जीवन, काट रहा इसी का वक़्त,
कभी लगता है यह है नरम, लेकिन कभी हो जाता ये सख्त!


Sunday, August 7, 2011

दोस्ती का प्यारा दिवस !

दोस्ती का प्यारा रिश्ता बड़ा है अनमोल,
अजीब है इसकी बोली, अजीब है इसका रोल,
ज़िन्दगी के राहों में साथ साथ चल,
हर एक नये दिन के साथ है अपने राज़ खोल!

जहा एक का मजाक दूसरे की हसी,
जहा एक की तकलीफ, बनी दूसरे की भी,
एक दूसरे को साथ ले बनाते हुए यादों की मीठी सी कड़ी,
प्रत्येक दिन जहा बजती है खुशियों से आतिश्वादियों की लड़ी!

नाम से थो किसी दोस्त ने आज तक नहीं बुलाया,
गाली-गमन की उप्लाप्धियों की यही है माया,
दोस्तों का माहोल जभी बन पाया,
खुशियों की मानो फ़ैल रही है छाया!

एक दिन मुश्किल था दोस्त तेरे बिन,
कैसे भूल सखता हु मैं तुझे आज के दिन!
दोस्ती दिवस तुझे मुबारक हो मेरे यार,
आपके लिए लाया हू इस कविता का उपहार!

Thursday, August 4, 2011

कल के खयाल में खो रहे आज का पल!

कल के खयाल में खो रहे आज का पल,

किसी अनजानी राह पर अब रहे थे चल,

हर समस्या का धीरज से निकल पायेगा हल,

लड़ने की रखो तुम क्षमता कभी न खोकर अपना बल |



कल के खयाल में खो रहे आज का पल,

माँ-भाई से होती सिर्फ पांच मिनट की गल,

समय की इस दौड़ में घर से आये निकल,

भूल गए थे कब देखा था पुराने दोस्तों की शकल |



कल के खयाल में खो रहे आज का पल,

निकल जाते थे जब खाने किसी भी सड़क या होटल,

आ जाता आखों के समक्ष पुरानी यादों का दलदल,

लगता साला कितनी तेज़ी से समय रहा बदल |

DIVIDE AND RULE!

Divide and Rule was the norm of the British,
That was something Indian freedom struggle did not wish,
Yet people want to shout with din,
With violence they think they will surely win!

United we stand but divided we fall,
But still we find people standing tall,
'Bandh' is what they happily call,
With protests and damages they lay there stall.

In the limelight of insanity,
People have lost what is called Humanity.
With Power comes responsibility,
But our politicians lack this ability.

Its not just the dividing of states,
Its the dividing of power, resources and ways,
I am still looking for a hopeful ray,
With differences many, one can hardly look for a peaceful day.--